April 18, 2026 12:50 am

हरियाणा में वित्तीय वर्ष के अंत में बजट का खेल

**हरियाणा में वित्तीय वर्ष के अंत में बजट का खेल**
हरियाणा राज्य में सरकारी विभागों, विशेषकर खेल विभाग, में वित्तीय वर्ष के लगभग अंतिम पड़ाव पर आकर बजट जारी करने की प्रक्रिया ने अनेक प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यह स्थिति पूरे वर्ष बजट आवंटन में बरती गई सुस्ती को उजागर करती है, जिसके बाद अब अचानक से विभागों में आवंटित राशि को खर्च करने की एक तीव्र होड़ देखने को मिल रही है। इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल विभिन्न परियोजनाओं के निर्धारित समय पर पूर्ण होने में बाधा आती है, बल्कि धन के उचित और प्रभावी उपयोग को लेकर भी गंभीर चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। यह स्थिति कहीं न कहीं वित्तीय प्रबंधन में खामियों की ओर इशारा करती है।

**साल भर की ढिलाई, अंतिम समय में तीव्र गतिविधि**
राज्य के कई सरकारी विभाग, जो पूरे वित्तीय वर्ष के दौरान बजट आवंटन और विभिन्न विकास परियोजनाओं पर अपेक्षाकृत धीमी गति से कार्य करते रहे हैं, अब वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में, यानी जनवरी से मार्च के बीच, अत्यधिक सक्रियता दिखा रहे हैं। वित्तीय वर्ष की समाप्ति 31 मार्च को होती है, और उससे पहले ही यह सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ जाता है कि आवंटित संपूर्ण राशि का उपयोग कर लिया जाए। इस हड़बड़ी में कई बार गुणवत्ता संबंधी मापदंडों से समझौता करना पड़ता है या फिर धन का उपयोग बिना किसी ठोस योजना के आनन-फानन में कर दिया जाता है, जिससे उसका वास्तविक और अपेक्षित लाभ जनता तक पूरी तरह से नहीं पहुँच पाता है।

**खेल विभाग पर विशेष ध्यान क्यों?**
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बार खेल विभाग में बजट जारी करने की प्रक्रिया को लेकर विशेष रूप से चर्चाएँ गर्म हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य में खेल से संबंधित विभिन्न योजनाओं, खेल सुविधाओं के उन्नयन और नई खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने वाली परियोजनाओं के लिए आवंटित फंड को वर्ष के अंतिम कुछ महीनों में ही अनुमोदन दिया गया है। यह देरी खिलाड़ियों के नियमित प्रशिक्षण, अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएँ प्रदान करने और राज्य में खेल संस्कृति को विकसित करने के दीर्घकालिक प्रयासों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है, जिससे उनकी क्षमता पर असर पड़ सकता है।

**अंतिम तिमाही में खर्च करने का भारी दबाव**
यह एक सामान्य प्रवृत्ति बन गई है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष की अंतिम तिमाही में, विशेषकर अंतिम तीन महीनों में, सरकारी विभागों पर बजट की शेष राशि को खर्च करने का भारी दबाव होता है। यह दबाव मुख्यतः इसलिए होता है ताकि आवंटित बजटीय राशि व्यपगत (lapse) न हो जाए और अगले वित्तीय वर्ष के लिए नए सिरे से आवंटन की प्रक्रिया से गुजरना न पड़े। इस प्रकार की तात्कालिकता में कई बार योजनाएँ उचित तरीके से क्रियान्वित नहीं हो पातीं या फिर धन का उपयोग मात्र कागजी खानापूर्ति के लिए कर दिया जाता है, जिससे उसकी प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।

**परियोजनाओं की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर सवाल**
अंतिम समय में की गई जल्दबाजी का सीधा असर अक्सर परियोजनाओं की गुणवत्ता और उनके टिकाऊपन पर पड़ता है। ठेकेदारों और एजेंसियों को निर्धारित समयावधि में काम पूरा करने के लिए अत्यधिक दबाव में लाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप निर्माण कार्यों या अन्य खरीद प्रक्रियाओं में निर्धारित मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण प्रोटोकॉल का ठीक से पालन नहीं हो पाता। इसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव जनता को मिलने वाली सुविधाओं और सेवाओं पर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, यदि खेल स्टेडियमों या प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता होता है, तो वे दीर्घकाल में समस्याओं का कारण बन सकते हैं और उन्हें अतिरिक्त मरम्मत की आवश्यकता पड़ सकती है।

**जनता के धन का प्रभावी उपयोग सर्वोपरि**
सरकारी बजट, वस्तुतः, जनता द्वारा दिए गए करों से संचित धन होता है, और इस धन का सदुपयोग सुनिश्चित करना किसी भी कल्याणकारी सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी है। यदि बजट आवंटन और खर्च की प्रक्रिया पूरे वर्ष एक सुचारू और नियोजित तरीके से संचालित नहीं होती है, तो यह जनता के सरकार पर विश्वास को कमजोर करता है। आर्थिक विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं का यह मानना है कि प्रभावी वित्तीय प्रबंधन नीतियों को अपनाकर और वर्ष भर योजनाबद्ध तरीके से खर्च करके इस तरह की अंतिम-समय की दौड़ और उससे उत्पन्न होने वाली अक्षमताओं से सफलतापूर्वक बचा जा सकता है।

**अधिकारियों की कार्यप्रणाली और नियोजन क्षमता पर प्रश्न**
यह पूरी स्थिति सरकारी अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनकी नियोजन तथा क्रियान्वयन क्षमताओं पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष की शुरुआत में ही एक प्रभावी और विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए तथा बजट का चरणबद्ध और समयबद्ध तरीके से उपयोग किया जाए, तो अंतिम समय की इस हड़बड़ी से आसानी से बचा जा सकता है। समय पर बजट आवंटन न होने से कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं या तो अधर में लटक जाती हैं या उनकी प्रारंभिक लागत में अनावश्यक वृद्धि हो जाती है, जिसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ता है।

**हरियाणा के खेल विकास पर नकारात्मक प्रभाव की आशंका**
हरियाणा राज्य ने हाल के वर्षों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलों के क्षेत्र में असाधारण प्रदर्शन किया है और यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण खेल हब के रूप में उभरा है। यदि ऐसे महत्वपूर्ण खेल विभाग को ही बजट आवंटन में बार-बार देरी का सामना करना पड़ता है, तो इसका सीधा और गंभीर नकारात्मक असर राज्य के समग्र खेल विकास पर पड़ना तय है। खिलाड़ियों को मिलने वाली अत्याधुनिक सुविधाएँ, कुशल कोचिंग, पोषण सहायता और विभिन्न राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी भागीदारी प्रभावित हो सकती है, जिससे उनकी बहुमूल्य प्रतिभा को पूर्ण रूप से निखारने के अवसर कम हो जाएंगे।

**राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति का अभाव**
कुछ राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषक इस प्रकार की वित्तीय अनियमितता को राजनीतिक और प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव से भी जोड़कर देखते हैं। उनका यह तर्क है कि यदि विभागों को समय पर पर्याप्त रूप से सशक्त किया जाए और उन्हें अपने कार्यों को कुशलतापूर्वक संपादित करने की आवश्यक स्वायत्तता प्रदान की जाए, तो इस तरह की अक्षमताओं से बचा जा सकता है। केवल वित्तीय वर्ष के समापन से ठीक पहले सक्रिय होना एक पुरानी और अप्रभावी कार्यप्रणाली का हिस्सा है, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी होती है, और जिसे तत्काल प्रभाव से बदलने की नितांत आवश्यकता है।

**आगे की राह: सुधार और बेहतर प्रबंधन की उम्मीद**
इस तरह की गैर-योजनाबद्ध वित्तीय प्रबंधन प्रथाओं से बचने के लिए एक ठोस, पारदर्शी और वार्षिक कार्ययोजना का क्रियान्वयन नितांत आवश्यक है। बजट को निर्धारित समय पर जारी करना, खर्च की प्रक्रिया की निरंतर और कड़ी निगरानी करना, तथा विभागों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह बनाना महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम हैं। यह आशा की जाती है कि राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे पर गंभीरतापूर्वक विचार करेगी और भविष्य में ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक और प्रभावी कदम उठाएगी, ताकि सार्वजनिक धन का अधिकतम, न्यायसंगत और कुशल उपयोग सुनिश्चित हो सके, जिससे राज्य के समग्र विकास को गति मिल सके।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें