March 28, 2026 11:57 am

चौटाला परिवार में नया विवाद | कर्ण चौटाला को भेजा लीगल नोटिस, Meham कांड फिर सुर्खियों में

हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर बवाल खड़ा हो गया है। चौटाला परिवार के दो राजनीतिक गुट—**INLD (Indian National Lok Dal)  और  JJP (Jannayak Janta Party) —के बीच नया विवाद सामने आया है।
इस बार मामला जुड़ा है **1990 के चर्चित Meham कांड** से, जिसके बारे में INLD नेता **  ** ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में कुछ बयान दिए थे। इन्हीं बयानों को JJP ने *झूठा, भ्रामक और मानहानिकारक* बताते हुए **कानूनी नोटिस भेज दिया है।**

* क्या कहा कर्ण चौटाला ने?

एक निजी न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में कर्ण चौटाला ने दावा किया कि:

*Meham कांड की FIR में JJP सुप्रीमो अजय सिंह चौटाला का नाम शामिल था ।
* उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में परिवार के कुछ सदस्यों की भूमिका संदिग्ध थी ।

कर्ण द्वारा दिया गया यह बयान सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ, जिसके बाद विवाद तेजी से बढ़ गया ।

 

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* JJP क्यों भड़की और नोटिस क्यों भेजा गया ?

JJP का कहना है कि कर्ण चौटाला के दावे **पूरी तरह झूठे और तथ्यों से परे** हैं।
JJP के राज्य प्रवक्ता **मंदीप बिश्नोई** ने कर्ण को **मानहानि का लीगल नोटिस** भेजते हुए कहा कि—

1. **1990 की FIR (फ़रियाद संख्या 76, दिनांक 1 मार्च 1990)** में **अजय सिंह चौटाला का नाम नहीं था।**
2. FIR में केवल **अभय सिंह चौटाला (INLD)** का नाम दर्ज था।
3. घटना वाले दिन अजय सिंह चौटाला **मेहम में मौजूद ही नहीं थे**, बल्कि वे उस समय **राजस्थान के डातारामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में** थे।
4. कर्ण का बयान तीस साल पुरानी घटना को तोड़-मरोड़कर पेश करने और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए दिया गया।

**नोटिस में JJP ने कर्ण से तीन माँगें रखी हैं—**

* 15 दिनों के भीतर लिखित और सार्वजनिक रूप से **माफी मांगें**,
* अपने इंटरव्यू में किए गए आरोपों को **वापस लें**,
* इंटरव्यू की वीडियो क्लिप और संबंधित पोस्ट **सोशल मीडिया से हटाएँ।**

वरना JJP ने अदालत में मानहानि का मुकदमा दायर करने की चेतावनी दी है।

** Meham कांड क्या था? (सिंपल शब्दों में)**

Meham (हिसार) में 1990 में उपचुनाव के दौरान **हिंसा, गोलीबारी और दो लोगों की मौत** हुई थी।
घटना में कई गंभीर धाराओं—302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 148 (दंगा), 149 (गैरकानूनी भीड़), आदि—के तहत केस दर्ज हुआ था।

यह मामला राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया था, क्योंकि इसमें चौटाला परिवार पर गंभीर आरोप लगे थे।

यही वजह है कि जब कर्ण चौटाला ने इसे फिर से उठाया, तो मामला तुरंत सुर्खियों में आ गया।

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** राजनीतिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि**

चौटाला परिवार लंबे समय से हरियाणा की राजनीति में प्रभावी रहा है।
लेकिन पिछले कुछ सालों से परिवार *दो अलग-अलग राजनीतिक दलों में बंटा हुआ है*—

* INLD — ओम प्रकाश चौटाला व अभय चौटाला के नेतृत्व में**
* JJP — दुष्यंत चौटाला और अजय सिंह चौटाला के नेतृत्व में**

इन दोनों दलों के बीच अक्सर बयानबाज़ी और राजनीतिक टकराव देखने को मिलता रहता है।
कर्ण चौटाला के बयान ने इसी पुराने विवाद को फिर से हवा दे दी है।

# ** अब आगे क्या? **

अब नजरें इस बात पर हैं कि—

* ** क्या कर्ण चौटाला माफी मांगेंगे?**
* ** क्या वे अपने बयान पर अडिग रहेंगे?**
* ** या दोनों पार्टियाँ अदालत का रास्ता अख्तियार करेंगी?**

अगर कर्ण नोटिस की शर्तें नहीं मानते, तो मामला कोर्ट तक पहुँच सकता है, जिससे परिवार के भीतर की खाई और गहरी हो सकती है।

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* कर्ण चौटाला ने 1990 Meham कांड में अजय सिंह चौटाला पर सवाल उठाए।
* JJP ने उनके बयान को झूठा बताते हुए कानूनी नोटिस भेज दिया।
* JJP का दावा—FIR में अजय का नाम कभी नहीं था, इसलिए यह बयान राजनीतिक बदनीयती से दिया गया।
* 15 दिनों में माफी न मिलने पर मामला मानहानि के मुकदमे में बदल सकता है।
* चौटाला परिवार की राजनीतिक जंग एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।

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