वर्षा के बाद ठंडे मोसम में इंद्रधनुष का खूबसूरत नजारा
आकाश में संध्या समय पूर्व दिशा में तथा प्रात:काल पश्चिम दिशा में, वर्षा के पश्चात् लाल, नारंगी, पीला, हरा, आसमानी, नीला, तथा बैंगनी वर्णों का एक विशालकाय वृत्ताकार वक्र कभी-कभी दिखाई देता है।
⏩इंद्रधनुष के बारे में ये बातें जानें:
✴️इंद्रधनुष, सूर्य के प्रकाश और वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण बनता है।
✴️इंद्रधनुष, हवा में मौजूद पानी की बूंदों, धुंध, स्प्रे, और ओस की वजह से बनता है।
✴️इंद्रधनुष, आकाश में एक बहुरंगी गोलाकार चाप जैसा दिखता है।
✴️इंद्रधनुष में सात रंग होते हैं – लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, नीला, और बैंगनीI
✴️इंद्रधनुष, सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में दिखाई देता है।
✴️इंद्रधनुष, संध्या के समय पूर्व दिशा में और सुबह के समय पश्चिम दिशा में दिखाई देता है।
✴️इंद्रधनुष शब्द लैटिन भाषा के ‘Arcus Pluvius’ शब्द से लिया गया है जिसका मतलब होता है ‘बरसात की soyabean’.
✴️इंद्रधनुष, पानी की बूंदों में प्रकाश के अपवर्तन और परावर्तन की वजह से बनता है।
✴️इंद्रधनुष, कभी-कभी पूर्ण वृत्त के रूप में भी दिखाई देता है, लेकिन आम तौर पर ज़मीन पर बनी एक चाप ही दिखाई देती है।
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